歌詞
[Verse 1]
वादों की बारिश, पर सूखी ज़मीन
चुनाव के बाद बदल जाए सीन
कुर्सी मिली तो बदला व्यवहार
जनता ही बन गई सबसे लाचार
सच की आवाज़ दबती रही
झूठ की दीवारें बढ़ती रहीं
मेहनत करे जनता दिन और रात
फिर भी अधूरे हर एक ख़्वाब
कागज़ों में सब कुछ साफ़ दिखे
अंदर से हर दफ़्तर काँप ही उठे
फ़ाइल के नीचे दबे सवाल
उपर से बस मीठी सी चाल
[Chorus]
भ्रष्टाचार का ये कैसा खेल
सच की राह क्यों पड़ती फेल
अब उठो, बोलो, बदलो हाल
जनता की ताकत सबसे कमाल
भ्रष्टाचार का ये कैसा खेल
सच की राह क्यों पड़ती फेल
अब उठो, बोलो, बदलो हाल
जनता की ताकत सबसे कमाल
[Verse 2]
नोटों से मत बिकने देना
अपने कल को झुकने न देना
वोट का हक़ है, सौदा नहीं
इंसाफ़ कोई तमाशा नहीं
नेता वही जो डर में जीए
हमारी चुप्पी पर राज़ करे
पर जब सड़क पर जनता उतरे
सारी नकली दीवारें हिले
एक हाथ में कलम, एक में हिम्मत
सच कहने की अब करनी आदत
घर-घर में जो जगा दे आग
वो ही तो लाए नया उजास
[Bridge]
अब और नहीं ये सहना है
झूठ के नीचे नहीं बहना है
एक साथ जब आवाज़ उठे
सिस्टम का चेहरा भी झुकना है
[Chorus]
भ्रष्टाचार का ये कैसा खेल
सच की राह क्यों पड़ती फेल
अब उठो, बोलो, बदलो हाल
जनता की ताकत सबसे कमाल
भ्रष्टाचार का ये कैसा खेल
सच की राह क्यों पड़ती फेल
अब उठो, बोलो, बदलो हाल
जनता की ताकत सबसे कमाल